उसके बाद उन्होंआनें जस गीत के आडियो भी प्रस्तु त किए. आजकल सीडी दुकानों में सहजता से जस गीत उपलब्धा हैं किन्तुन इन बाजारू सीडीयो में हमारा पारंपरिक जसगीत कहीं खो गया है. मैनें ललित भाई को इस प्रयास के लिए यद्यपि बधाई दिया कि हमारी भाषा एवं संस्कृ ति का कुछ अंश उन्होंनें लोगों के बीच लाने का प्रयास किया किन्तु् आजकल जो गीत सीडी में बाजार में प्रस्तुुत हो रहे हैं उन उन्हें मैं ?
But with no colour difference, how do your readers know where to hover the cursor?